Thursday, April 28, 2011

" नींद के बादलों के पीछे है "




नींद के बादलों के पीछे है मुस्कुराता हुआ एक चेहरा

चेहरे पर बिखरी एक रेशमी लट

सरसराता हुआ कोई आँचल और दो आँखे हैरान हैरान सी...........

नींद के बादलों के पीछे है एक मुलाक़ात, एक हसी लम्हा

झील का ठहरा ठहरा सा पानी

पेड़ पर चह चहाती एक चिड़ियाँ

घास में खिलते नन्हे नन्हे फूल

खुबसूरत लबो पे नर्म सी बात

नींद के बादलों के पीछे है दोपहर एक पिली पिली सी

लोहे की ठंडक के लहजे में

टूटा आईयना, उड़ते कुछ कागज

केचु केचुं बिखरता एक मंजर

पलकों पे झिलमिलाता एक आंसूं

गहरा सन्नाटा ...शोर करता हुआ

नींद के बादलों के पीछे है.................................................

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